लू लगने से मृत्यु: विस्तृत जानकारी - उदाहरणों सहित

लू (हीट स्ट्रोक) एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है जो तब होती है जब शरीर का तापमान तेज़ी से बढ़ जाता है और उसे नियंत्रित करने की क्षमता खो देता है। यह अत्यधिक गर्मी और निर्जलीकरण के कारण होता है।

लू लगने के लक्षण:

तेज बुखार (104°F या उससे अधिक)

गर्म, शुष्क त्वचा

तेज पसीना आना या पसीना न आना

तेज सिरदर्द

चक्कर आना या भ्रम

मांसपेशियों में ऐंठन

तेज नाड़ी

तेज़ सांस लेना

बेहोशी

लू लगने से मृत्यु होने के कारणों में शामिल हैं:

मस्तिष्क क्षति: अत्यधिक गर्मी मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे दौरे, कोमा और मृत्यु हो सकती है।

उदाहरण: 2010 में भारत में, एक लू के कारण हजारों लोगों की मृत्यु हो गई थी। कई पीड़ितों को मस्तिष्क क्षति और अंग विफलता का अनुभव हुआ था।

अंग विफलता: गर्मी हृदय, गुर्दे और यकृत जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे अंग विफलता और मृत्यु हो सकती है।

उदाहरण: 2019 में अमेरिका में, एक लू के कारण एक 65 वर्षीय व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी। मृत्यु का कारण हृदय और गुर्दे की विफलता थी।

निर्जलीकरण: गर्मी से शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जिससे रक्तचाप कम हो सकता है, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो सकता है और मृत्यु हो सकती है।

उदाहरण: 2016 में पाकिस्तान में, एक लू के कारण 1300 से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई थी। अधिकांश पीड़ितों की मृत्यु निर्जलीकरण से हुई थी।

कुछ लोग लू लगने के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं:

बुजुर्ग: उनके शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कम होती है।

शिशु और छोटे बच्चे: उनके शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कम होती है और वे अधिक निर्जलीकरण के प्रति संवेदनशील होते हैं।

गर्भवती महिलाएं: उनके शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कम होती है और वे निर्जलीकरण के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं।

स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोग: जैसे हृदय रोग, मधुमेह, और गुर्दे की बीमारी वाले लोग।

मोटापे से ग्रस्त लोग: उनके शरीर में अधिक वसा होती है, जो गर्मी को फँसा सकती है।

कुछ दवाएं लेने वाले लोग: जैसे मूत्रवर्धक और कुछ एंटी-डिप्रेसेंट।

हमारे शरीर का तापमान हमेशा 37° डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम कर पाते है।


पसीने के रूप में पानी बाहर निकालकर शरीर 37° सेल्सियस टेम्प्रेचर मेंटेन रखता है, लगातार पसीना निकलते वक्त भी पानी पीते रहना अत्यंत जरुरी और आवश्यक है।


पानी शरीर में इसके अलावा भी बहुत कार्य करता है, जिससे शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालना टालता है। ( बंद कर देता है )
जब बाहर का टेम्प्रेचर 45° डिग्री के पार हो जाता है और शरीर की कूलिंग व्यवस्था ठप्प हो जाती है, तब शरीर का तापमान 37° डिग्री से ऊपर पहुँचने लगता है।

शरीर का तापमान जब 42° सेल्सियस तक पहुँच जाता है तब रक्त गरम होने लगता है और रक्त मे उपस्थित प्रोटीन  पकने लगता है ( जैसे उबलते पानी में अंडा पकता है )


स्नायु कड़क होने लगते है इस दौरान सांस लेने के लिए जरुरी स्नायु भी काम करना बंद कर देते हैं।
शरीर का पानी कम हो जाने से रक्त गाढ़ा होने लगता है, (ब्लडप्रेशर लोव) हो जाता है, महत्वपूर्ण अंग ( विशेषतः ब्रेन ) तक ब्लड सप्लाई रुक जाती है।
व्यक्ति कोमा में चला जाता है और उसके शरीर के एक- एक अंग कुछ ही क्षणों में काम करना बंद कर देते हैं, और उसकी मृत्यु हो जाती है।

गर्मी के दिनों में ऐसे अनर्थ टालने के लिए  लगातार थोड़ा थोड़ा पानी पीते रहना चाहिए, और हमारे शरीर का तापमान 37° मेन्टेन किस तरह रह पायेगा इस ओर ध्यान देना चाहिए।
( Equinox phenomenon ) इक्विनॉक्स प्रभाव अगले 5 -7 दिनों मे एशिया के अधिकतर भू-भाग को प्रभावित करेगा।

 कृपया दोपहर 12 से 3 बजे के बीच ज्यादा से ज्यादा घर, कमरे या ऑफिस के अंदर रहने का प्रयास करें।
तापमान 40° डिग्री के आस पास विचलन की अवस्था मे रहेगा।
यह परिवर्तन शरीर मे निर्जलीकरण और सूर्यातप की स्थिति उत्पन्न कर देगा।
ये प्रभाव भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर सूर्य चमकने के कारण पैदा होता है।

कृपया स्वयं को और अपने जानने वालों को पानी की कमी से ग्रसित न होने दें।

किसी भी अवस्था मे कम से कम 3 ली. पानी जरूर पियें।किडनी की बीमारी वाले प्रति दिन कम से कम 6 से 8 ली.  पानी जरूर लें।

जहां तक सम्भव हो ब्लड प्रेशर पर नजर रखें। किसी को भी हीट स्ट्रोक हो सकता है।

ठंडे पानी से नहाएं। मांस का प्रयोग छोड़ें या कम से कम करें।

फल और सब्जियों को भोजन मे ज्यादा स्थान दें।

 एक बिना प्रयोग की हुई मोमबत्ती को कमरे से बाहर या खुले मे रखें, यदि मोमबत्ती पिघल जाती है तो ये गंभीर स्थिति है।

शयन कक्ष और अन्य कमरों मे 2 आधे पानी से भरे ऊपर से खुले पात्रों को रख कर  कमरे की नमी बरकरार रखी जा सकती है।

अपने होठों और आँखों को नम रखने का प्रयत्न करें।

लू से बचाव के लिए:

पानी पीते रहें: दिन भर में भरपूर मात्रा में पानी पीएं, भले ही आपको प्यास न लगे।

ठंडे स्थानों पर रहें: यदि हो सके तो, एयर कंडीशनिंग या पंखे वाले कमरे में रहें।

ढीले-ढाले और हल्के रंग के कपड़े पहनें: गहरे रंग के कपड़े गर्मी को अवशोषित करते हैं।

धूप से बचें: गर्मी के दिनों में, खासकर 10 बजे से 4 बजे के बीच, धूप से बचें।

शारीरिक गतिविधि कम करें: गर्मी के दिनों में ज़ोरदार व्यायाम या शारीरिक गतिविधि से बचें।

अल्कोहल और कैफीन से बचें: ये पदार्थ शरीर को निर्जलीकृत कर सकते हैं।

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